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What is depression and types in Hindi?

What is depression and types in Hindi?

हर कोई अच्छा जीवन जीना चाहता है, लेकिन हर इस दुनिया में येसा कोई आदमी नहीं या औरत नहीं है उसे डिप्रेशन नहीं होता. आज के भागदौड़ की जीवन में हम कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है. हर कोई कहता है की उसे जिंदगी का तजुर्बा है, उसे किसी भी तरह की मानसिक तनाव नहीं है. लेकिन वह बोलने के लिए ये कहता है, पर जब भी वह अकेला होता है तो उसे इस बात का एहसास होता है की उसे क्या तनाव है.

जैसे स्कूल-कॉलेज के बच्चो का पढाई, कोचीन क्लास, दोस्तों के बिच टकराव, भविष्य के बारेमे चिंता इत्यादि, सरकारी या प्राइवेट में काम करने वालो की समस्या, महीने का खर्चा, बच्चो के फी, बैंक के लोन के देना, ज्यादा समय तक काम, महिलाओ की समस्या,

यह हो गयी घरेलु तनाव, लेकिन जब कोई साथ रहने वाला परिवार, मित्र या जानपेहचन वाला व्यक्ति का आकास्तित मृत्यु , दवाखाना का खर्चा इत्यादि बाते सुनकर या देखकर जो हमारे मन पर जो परिणाम होता है, उसे भी तनाव ही कहा जाता है.

पिछले एक साल से करोना की महामारी से पूरी दुनिया परेशान है, तब दुनिका में मौत के आकडे देखकर हर कोई दुखी था और शुक्रिया मान रहेते की हमारे देश में ये जादा नहीं हुआ.

लेकिन जब इसका दूसरी दौर में देश की आरोग्य व्यवस्था पूरी तरह टूट गयी है. देश की बिकाऊ मिडिया इसे सरकार की नहीं बल्कि सिस्टम की गलादी बताकर देश के प्रधानमंत्री की छवि बचने में लगी थी. लेकिन सच कभी नहीं छुपता है.  इस की चपेट सेकोई बच नहीं पा रहा है. देश के बड़े-छोटे शहरों में परिवार के दो से तीन सदस्य बीमार है, न्यूज़, सोशल मीडिया, और कुछ online न्यूज़ के बदोलत सच पूरी दुनिका के साम ने आगया.

बीमारी से कोई मरता है तो उसके परिवार इस सदमेसे निकाल ने के बजाये वह भी मानसिक तनाव में अगर बीमार हो रहे है. इसमें से कई लोग तो मर रहे है.

सोशल मिडिया पर आरही खबर जैसे गंगा नदी में बहती लाशे, ऑक्सीजन, हॉस्पिटल में बेड ना मिलने के कारण लोगो की मौत इससे भी मानसिक तनाव बढ़ रहा है.

मानसिक तनाव क्या होता है?

जब कोई घटना होती है तो वह देखकर, सुनकर, पढ़कर दिमाग 'हमें बताता रहाता है' कि कुछ गड़बड़ है लेकिन अगर मस्तिष्क 'बताता रहे' कि कुछ गड़बड़ है, जबकि वस्तुनिष्ठ रूप से,ऐसा नहीं है, यह नैदानिक ​​अवसाद हो सकता अगर हमारे व्यवहार में उदास या उदास महसूस होना इसे मानसिक तनाव कहा जाता है.

तीव्र उदासी, निराशा, व्यर्थता या लाचारी की भावनाएँ जो दिनों, हफ्तों या महीनों से अधिक समय तक रहता है.

मानसिक तनाव दो प्रकार के होते है.

1.      प्रमुख तनाव (Major Depression):- यह तनाव जादा से जादा एक-दो या एक सप्ताह तक रह सकता है. आप एक दो बार भयानक या बहुत दुखी महसूस करेंगे, लेकिन कुछ समय बाद यह दूर हो जाता है. प्रमुख अवसाद के लक्षण हैं: जीवन में रुचि की कमी, दोषी महसूस करना बिना किसी विशेष कारण के, आत्महत्या के विचार, वजन कम होना या बढ़ना, कम सोना या हर समय बहुत अधिक थक जाना या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना. यह भी साथ है कम आत्मसम्मान से, कम आत्मसम्मान वाले लोगों को प्रमुख होने का अधिक जोखिम होता है.

2.     लगातार मानसिक तनाव ( Persistent Depressive disorder) इसके प्रमुख तनाव के लक्षण होते है पर यह एक-से दो साल या उसे भी ज्यादा समयतक रह सकते है.

रिसर्च के मुताबित 2020 के बाद मानसिक तनाव यह दुनिया में बीमारी की दूसरी बड़ी समस्या बन चुकीहै.

तनाव आने के कारण :-

Major Depression: प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार या नैदानिक ​​अवसाद एक ऐसी बीमारी है जो एक को प्रभावित कर सकती है.जो व्यक्ति भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक रूप से तनाव में आता है. इसके कुछ लक्षण नीचे दिए है.

भूख ना लगना, लगातार उदास महसूस होना, उदासी के अलावा कुछ भी महसूस करने में असमर्थता होना, निराशा और लाचारी की भावना, भविष्य अंधकारमय महासुर होना, हर समय थकान या सुस्ती महसूस होना, अच्छी रात की नींद के बाद भी थक कर उठना, हर समय सोने की इच्छा होना, वजन कम होना या बढ़ना, शादीशुदा जीवन में सेक्स में रुचि की कमी, आत्महत्या के बारे में सोचना.

पश्याताप ( Dysthymia):  डिस्टीमिया यह एक मानसिक तनाव का ही एक रूप है जिसमें समग्र रूप से हल्के लक्षण होते हैं लेकिन ये लक्षण पुराने हैं, क्योंकि वे वर्षों तक रह सकते हैं

दैनिक गतिविधियों में आपके लिए कोई दिलचस्पी नहीं होगी, इसलिए आप कुछ भी करने के लिए प्रेरित नहीं होंगे, उदास हो जाना, निराशा ,छोटी छोटी बातो पर गुस्सा होता या जल्दी गुस्सा होते रहना, भुतकल में कुछ गल्दी या कुछ घटना से खुद को ही दोषी महसूस होना, हमेश निराशावादी रहना, नींद ना आना,

यह जादा समयतक रह सकती है, लेकिन इसमें समय के दौरान लेकिन तीव्रता में उतार-चढ़ाव होगा, आपके अच्छे और बुरे दिन हो सकते हैं। हालांकि यह सामान्य है, तो बुरे दिन महीनों तक चलते हैं और केवल कुछ अच्छे दिन ही जाते हैं

मानसिक (Mental depression) अवसाद: यह एक प्रकार का तनाव है जो किसी प्रकार के मनोविकार तत्व की विशेषता है, इसका मतलब है कि क्लासिक के साथ तनाव के लक्षण, मानसिक तनाव से पीड़ित व्यक्ति हो सकता है मतिभ्रम का अनुभव करें जैसे कि आवाजों की सुनवाई, या गलत धारणाएं, कोई साथ है एसा महसूस होना या यह विचार आना कि आप बेकार या पापी हैं

प्रसुती / बच्चे के जन्म देने के बाद का तनाव( Postpartum Depression):- बच्चे के जन्म के बाद पहले साल में यह बदलाव या इस दौरान कभी भी शुरू हो सकता है. अभ्यास में पता लगा है 10-15% महिलाओ में यह पाया गया है जो पहली बार माँ बन चुकी है. इसके कुछ लक्षण :

भूक ना लगना, अपने बच्चे के प्रति नाराजगी या नफरत, बहोत जादा गुस्से की भावना, अपर्याप्तता की भावना, अपने बच्चे के साथ जुड़ने या उसे प्यार करने में असमर्थता, बिना मतलब मिजाज़ करना, नींद न आना, अपने पति, परिवार और दोस्तों से दूर रहने की कोशिश करना, बच्चे को नुकसान करने के बारेमे सोचना,

Seasonal Affective disorder:

इस के नाम के अनुसार की इसका नाम seasonal affective disorder है. यह तनाव जबभी वातावरण के बदलाव के बाद जो हमारे शरीर और मन में जो बदलाव होता है, इस ही seasonal affective disorder कहा जाता है. जैसे धुपकले में जादातर अप्रैल और मई महिनेमे जो जादा धुप होती है उससे हमें दुपहर को बहोत ही उदास जैसे लगता है. ठण्ड के महिनेमे जब काले बादल होते है तो भी हमें उदासीन महसुसू होता है. जादा तर लोग इस दरमियान कुछ काम करने की इच्छा नहीं होती है.

ठण्ड के महीनो में कुछ लक्षण दीखते है.

·         थकन महसुसू होती है.

·         जादा समय तक सोने का मन करना.

·         वजनबढ़ना और जादा तलेहुआ पदार्थ खाने की लालसा होना.

·         चिडचिडा होना.

गर्मी यो के महिना के कुछ लक्षण

·         भूख ना लगना,

·         वजन में कमी,

·         चिंतीत रहना और उदास रहना,

Bipasolar disorder या manic depressive disorder:

इस में पीड़ित व्यक्ति एक पल के लिए उत्साह का अनुभव कर सकता है अगला बेहद उदास और दुखी होता है.

इस में उत्साह में कुछ लक्षण

·         वे चरम सुख का अनुभव करेंगे, उत्साह की सीमा तक सिमित नहीं होती है

·         आप अपने बारे में बहुत अच्छा महसूस करेंगे.

·         जल्दी जल्दी बोलना.

·         खराब निर्णय लेने का कौशल

·         जल्दी गुस्सा होना.

·         चिड़चिड़ापन

·         उच्च जोखिम भरे गतिविधि में वृद्धि,  इसमें अमानवी यौन(unhuman sex) शामिल हो सकते हैंआदतें, बहुत अधिक शराब पीना या लापरवाही से गाड़ी चलाना.

·         पैसा खर्च करने में लापरवाही

·         सेक्स में बहोत ही ज्यादा दिलचस्पी

·         ज्यादा नींद नहीं आना

इस में उदासी  में कुछ लक्षण

·         दुखी रहना,

·         भविष्य के बारे में अंधकार की भावना

·         भूख की कमी

·         सोने में कठिनाई

·         चिंता में रहना,

·         जीवन में सुख की कमी रहेगी। सामान्य शौक जो लाए आनंद अब वैराग्य के साथ मिलेगा,

·         चिड़चिड़ापन

·         थकन महसुसू होना.

बचपन का अवसाद (dipression)

जब आपका बच्चा विकसित होता है तो यह सिर्फ एक दैनिक भावना हो सकती है. जब आपका बच्चा उदास होता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह या वह उदास है. यदि आपका बच्चा प्रतिदिन लगातार उदास रहता है, उसे कोई समस्या हो सकती है. इस के कुछ और भी कारण हो सकते है अगर वह भावना उसे बाधित करती है स्कूल के काम, जीवन और रुचि सहित दिन-प्रतिदिन की गतिविधियाँ इत्यादि.

Teen डिप्रेशन:

डॉक्टर से बात करना सबसे अच्छा है जब आप ध्यान दें कि आपका जवान बेटा या बेटी लगातार सप्ताह उदास है. वे अलग हो सकते हैं जब आप उनसे बात करते हैं और वे अपने माता-पिता के साथ अच्छी तरह से संवाद नहीं करते हैं. वे एकांत महसूस करते हैं और वे अपने दोस्तों के साथ संपर्क कम कर देते हैं. यह एक गंभीर मामला है   इसलिए ठीक से संबोधित या बातचीत करने की जरूरत है.

 

(Secondary dipression) माध्यमिक अवसाद:

यह जब भी कोई गहरी बीमारी होती है लेकिन उसे समाज में या अपने किसी को बता नहीं सकते है, उस हालत में इस तरह इन्सान की हालत होती है उसे secondary dipression में आता है. जैसे एड्स, cancer जैसे बीमारी.

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